नेपालका प्रमुख प्राथमिकता प्राप्त जडीबुटीहरू
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क्रम
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जडीबुटीको नाम
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वैज्ञानिक नाम
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पाइने उचाइ (मिटरमा)
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मुख्य प्राप्ति क्षेत्र (नेपालका क्षेत्र/जिल्ला)
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मुख्य उपयोगिता र विशेषताहरू
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१.
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अतिस
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Aconitum heterophyllum
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२४०० – ४१००
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मध्य नेपालका पहाडी भेग (जस्तै: काभ्रे, दोलखा, धादिङ, गोरखा, लमजुङ आदि)
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ज्वरो, खोकी, दाँत दुखाइ र तागतका लागि,
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२.
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अमला
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Phyllanthus emblica
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१५० – १६००
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नेपालभर (विशेषगरी पूर्वी नेपालमा बढी)
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भिटामिन 'सी' को प्रचुर स्रोत, पाचन, जन्डिस र त्रिफला बनाउनको लागि,
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३.
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ओखर
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Juglans regia
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१२०० – ३०००
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मध्य तथा पश्चिमी पहाडी क्षेत्र (धादिङ, गोरखा, पाल्पा, सल्यान, रुकुम आदि)
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स्मरण शक्ति तेजिलो बनाउने, बोक्रा र पातबाट रङ र औषधि बनाउनको लागि,
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४.
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कुटकी
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Neopicrorhiza scrophulariiflora
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३६०० – ४८००
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उत्तर फर्केका भिर र चट्टानी क्षेत्रहरू अर्थात् ओसिलो र ओझेल परेका ठाडो भिर तथा ढुङ्गेनी भूभाग
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पित्तनाशक, ज्वरो घटाउन र मुटुको तागतका लागि,
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५.
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गुच्ची च्याउ
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Morchella spp.
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२००० – ३५००
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हिमाली जिल्लाका वनहरू (कोणधारी रूखहरू (धूपी, सल्ला) र बुट्यानयुक्त झाडीहरू (खर्क) पाइने हिमाली क्षेत्रका वनहरू)
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तागतका लागि र स्वादिलो तरकारीका रूपमा,
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६.
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गुर्जो
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Tinospora sinensis
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३०० – १५००
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नेपालभरका पहाडी भेगहरू
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औषधिय चिया र रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता बढाउन,
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७.
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चिराईतो
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Swertia chirayita
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१५०० – ३०००
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पहाडी भेगका खुला ठाउँ र जङ्गल
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औलो (मलेरिया), ज्वरो र पाचन शक्ति बढाउन,
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८.
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जंगली सयपत्री
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Tagetes minuta
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१२०० – २५००
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पहाडी भेगका खेतबारी र खुल्ला ठाउँ
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सुगन्धित तेल र औषधिका रूपमा प्रयोग हुने,
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९.
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जटामसी
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Nardostachys grandiflora
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३६०० – ५०००
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उच्च हिमाली भेगका खुला खर्क, भिर र ओसिला चट्टानी क्षेत्रहरू
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सुगन्धित तेल, सौन्दर्य प्रसाधन र छारे रोगमा,
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१०.
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झ्याउ
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Parmelia nepalensis
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२,००० – ४,५००
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मुख्यतया महाभारत र हिमाली क्षेत्रका रुखको काण्ड (बोक्रा) र ओसिला चट्टानहरूमा टाँसिएर उम्रने
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औषधि र सुगन्धित द्रव्य बनाउन,
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११.
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टिमुर
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Zanthoxylum armatum
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११०० – २५००
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मध्य पहाडी भेग
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मसला, दाँतको औषधि र सुगन्धित तेलका लागि,
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१२.
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तेजपात
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Cinnamomum tamala
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४५० – २१००
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पहाडी भेगका ओसिला खोल्साहरू
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मसला, खोकी र पाचन सम्बन्धी औषधि
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१३.
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घसिङ्गरे
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Gaultheria fragrantissima
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१२०० – २७००
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पहाडी भेगका झाडीहरू
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'विन्टरग्रिन' तेल र दुखाइ कम गर्ने औषधि
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१४.
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नीम
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Azadirachta indica
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१०० – ९००
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तराई र भित्री मधेश (चितवन, दाङ, सुर्खेत आदि)
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छालाको रोग र कीटाणुनाशकका रूपमा,
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१५.
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पदमचाल
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Rheum australe
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३००० – ४२००
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हिमाली चट्टान र घाँसे मैदान
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कब्जियत खुलाउन, बाथ र दाँत सफा गर्न,
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१६.
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पाषणभेद
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Bergenia ciliata
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१६०० – ३६००
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पहाडी भेगका ओसिला चट्टानहरू
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मिर्गौलाको पत्थरी र ज्वरो नियन्त्रणमा उपयोगी,
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१७.
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पाँचऔंले
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Dactylorhiza hatagirea
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२८०० – ४२००
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मध्य र पश्चिम नेपालका ओसिला मैदान
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शक्तिवर्धक टनिक र यौन दुर्बलता हटाउन,
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१८.
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पिपला
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Piper longum
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२०० – ८००
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तराई र तल्लो पहाडी भेग
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खोकी, दम र मसलाका रूपमा प्रयोग हुने,
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१९.
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बिख
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Aconitum spicatum
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१८०० – ४२००
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नेपालका पहाडी भेग (पूर्वदेखि पश्चिम)
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प्रशोधनपछि पशु र मानिसको औषधिमा,
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२०.
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बोझो
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Acorus calamus
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२०० – २३००
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ओसिलो सिमसार र नदी किनार
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घाँटीको समस्या, खोकी र दिमागको टनिकको रुपमा,
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२१.
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भ्याकुर
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Dioscorea deltoidea
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४५० – ३१००
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चुरे र महाभारत पहाडी क्षेत्र
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हर्मोन उत्पादन र साबुन बनाउन प्रयोग गरिने,
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२२.
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मजिठो
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Rubia manjith
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१२०० – २७००
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नेपालभरका पहाडी झाडीहरू
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प्राकृतिक रङ, अल्सर र छालाको रोगमा,
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२३.
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यार्सागुम्बा
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Ophiocordyceps sinensis
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४२०० – ५०००
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मध्य र पश्चिम नेपालका उच्च हिमाल तथा लेकाली खर्क (घाँसे मैदान) हरू - यो विशेषगरी डोल्पा, जुम्ला, मुगु, दार्चुला, बझाङ, र मनाङका हिमाली भेगमा बढी पाइन्छ,
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शक्तिवर्धक, यौन उत्तेजक र स्मरण शक्ति बढाउन
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२४.
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रिठ्ठा
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Sapindus mukorossi
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६०० – १४००
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पश्चिम र मध्य पहाडी भेग
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प्राकृतिक स्याम्पु, साबुन र छारे रोगको उपचारमा
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२५.
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लघुपत्र
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Podophyllum hexandrum
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२४०० – ४५००
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मध्य र पश्चिम नेपालका उच्च हिमाली भेगहरू
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क्यान्सर विरुद्धको औषधि र पाचन सम्बन्धीमा
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२६.
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लौठसल्ला
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Taxus wallichiana
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२३०० – ३४००
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नेपालभर (विशेषगरी पश्चिममा बढी)
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क्यान्सर विरुद्धको औषधि 'ट्याक्सोल' बनाउन
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२७.
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सुगन्धकोकिला
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Cinnamomum glaucescens
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१००० – २५००
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मध्य र पश्चिम नेपालका पहाडी भेग र महाभारत पर्वत शृङ्खलाका वनहरूमा (रोल्पा, दाङ, सल्यान आदि)
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सुगन्धित तेल र औषधि बनाउन
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२८.
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सुगन्धवाल
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Valeriana jatamansii
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१५०० – ३६००
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पहाडी भेगका ओसिला जङ्गल
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मानसिक शान्ति, छारे रोग र सुगन्धित तेल
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२९.
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सतावरी
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Asparagus racemosus
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१५० – २१००
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तराई र तल्लो पहाडी भेग
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शक्तिवर्धक औषधि र पौष्टिक आहारका रूपमा
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३०.
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सर्पगन्धा
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Rauvolfia serpentina
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१०० – १२००
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तराई र चुरे क्षेत्रका जङ्गल
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उच्च रक्तचाप र अनिद्रा नियन्त्रण गर्न
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